बच्चो का देर बाद बोलना – एक चिंता का विषय

बच्चो का देर बाद बोलना – एक चिंता का विषय

बच्चो का देर बाद बोलना शुरू करना भी एक चिंता का विषय है।  बच्चे की मासूम बातचीत को सुनने से ज्यादा रोमांचक और कुछ नहीं हो सकता। पर कई बार ऐसा होता है कुछ बच्चे तय समय के बाद भी बोलना शुरू नहीं करते हैं। आपका बच्चा जिस उम्र में बोलना शुरू करता है वो दूसरे बच्चों से भिन्न हो सकता है। बच्चो का नियमत समय पर बोलना उनके जीवन में अहम भूमिका निभाता है। जो बच्चे देरी से बोलना शुरू करते है, उनकी  शारीरिक और  मानसिक व्रिद्धि भी देरी  से होती है,  क्योंकि उन्हें शब्दों को समझने और बोलने में वक्त लगता है।

जब आपका बच्चा तय समय पर भी बोलना शुरू नहीं करता है तो आप उपाय ढूंढने लगते हैं। बच्चे जिस उम्र में बोलना शुरू करते हैं, वह कई बातों पर निर्भर करता है। अगर आपको लगे कि आपका बच्चा एक निश्चित उम्र को पार करने के बाद भी नहीं बोल पा रहा है, तो फिर आपको डाक्टर या स्पीच थेरेपिस्ट की मदद लेनी चाहिए। अगर आपके बच्चे के न बोलने में कोई मेडिकल प्राब्लम नहीं है, तो आप कुछ आसान तरीका अपनाकर बच्चे को बोलना सिखा सकते हैं।

देरी से बोलने वाले बच्चो के लक्षण:

3 – 4  महीने की आयु तक

  • बच्चे ऊँची आवाज़ का कोई जवाब नही देते।
  • ना ही रोते है।
  • ना ही वह आवाज़ आने वाली दिशा में सिर घुमाते है।
  • ध्यानआकर्षित करने के लिए किसी आवाज़ का प्रयोग नही करते।

14  महीने  की आयु तक

  • किसी एक शब्द जैसे  “मामा” का प्रयोग नही करते।
  • हाथ हिलाने या किसी भी इशारे को नही समझते।
  • बच्चा वार्तालाप के लिए सिर्फ रोता है।
  • रोने के इलावा किसी दूसरी आवाज़ का प्रयोग नही करता।

2  साल की आयु तक

  • देरी से बोलने वाले बच्चे इस आयु में 15 शब्द नही बोल सकते1
  • बिना दोहराये दो शब्द का प्रयोग नही कर सकते1
  • किसी भी शब्द या इशारे का तुरंत जवाब नही देते1
  • इस आयु में बच्चे अपनी बात को पूरी तरह से समझा नही पाते और जल्दी निराश हो जाते है1

कुछ महत्वपूर्ण बातें:-

  • अपने बच्चे को दूसरों से घुलने-मिलने दें। इससे आपका बच्चा बोलने की कोशिश करेगा।
  • बच्चे के बोलने में देरी की एक मुख्य वजह पेरेंट की व्यस्त जिंदगी भी है। आप अपने बच्चे से बात कर के भी उन्हें बोलना सिखा सकते हैं। आप यह बिल्कुल न सोचें कि आप जो बोल रहे हैं, वो उनकी समझ में आएगा या नहीं। आप बस उनसे बात करना शुरू कर दें और वह जवाब देने लगेगा।
  • अगर आपके बच्चे ने बोलना शुरू नहीं किया है तो उन्हें सोने से पहले कोई कहानी सुनाएं। यह आपके बच्चे में कम्युनिकेशन स्किल के विकास में जादुई असर करेगा।
  • बच्चे के सामने जानवर, उपकरण या बच्चे के खिलौने के आवाज की नकल उतारें। आपका बच्चा इस आवाज को बखूबी दोहरा लेगा। इसके जरिए आप उनसे कुछ सामान्य इस्तेमाल में आनी वाले शब्द भी दोहरा सकेंगे।
  • बच्चे से बात करने के दौरान उन्हें कुछ शब्द दोहराने के लिए कहें। उन शब्दों पर ज्यादा ध्यान दें, जिनका इस्तेमाल आप सबसे ज्यादा करते हैं।
Motherhood Fertility & IVF Team
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