Medically Reviewed By
Dr. Neeraj Kumar
Chief Consultant – Paediatrician & Neonatologist, Motherhood Chaitanya Hospital
सर्दियों में शिशु को धूप दिखाना भारत के लगभग हर घर की परंपरा है। दादी–नानी कहती हैं कि धूप से बच्चे की हड्डियां मजबूत होती हैं, और इसमें सच्चाई भी है। लेकिन शिशु की त्वचा बहुत नाजुक होती है, और सिर्फ धूप से उसकी विटामिन D की जरूरत हमेशा पूरी नहीं होती। इस लेख में जानिए शिशु को धूप कैसे दिलाएं, कितनी देर और किस समय, किन सावधानियों का ध्यान रखें और विटामिन D ड्रॉप्स की जरूरत कब पड़ती है।
धूप से विटामिन D कैसे मिलता है
जब सूरज की यूवीबी किरणें (धूप की एक खास तरह की किरणें) त्वचा पर पड़ती हैं, तो शरीर खुद विटामिन D बनाता है। विटामिन D शरीर को खाने से कैल्शियम सोखने में मदद करता है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत बनते हैं। यह मांसपेशियों और शरीर के सुरक्षा तंत्र के लिए भी जरूरी है।
कुछ बातें जानना जरूरी है:
- शीशे के पीछे से धूप लेने पर विटामिन D लगभग नहीं बनता, क्योंकि शीशा इन किरणों को रोक देता है। बंद खिड़की के पास बैठकर गर्माहट तो मिलती है, पर विटामिन D नहीं।
- सुबह 7–8 बजे की हल्की धूप में ये किरणें कम होती हैं। विटामिन D बनाने वाली किरणें दिन के बीच के समय ज्यादा होती हैं।
- कोहरा, स्मॉग और बादल इन किरणों को काफी कम कर देते हैं।
- सांवली त्वचा को उतना ही विटामिन D बनाने में ज्यादा समय लगता है।
शिशु को धूप दिखाने का सही समय और तरीका
6 महीने से छोटे शिशु
बहुत छोटे शिशु की त्वचा जल्दी जल सकती है, और वह अपना तापमान भी ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता। इसलिए डॉक्टर आम तौर पर सलाह देते हैं कि 6 महीने से छोटे बच्चे को लंबे समय तक सीधी तेज धूप में न रखें।
अगर आप छोटे शिशु को धूप दिखाना चाहते हैं:
- हल्की धूप वाली जगह चुनें, जैसे खुली बालकनी या छत का वह कोना जहां सीधी तेज धूप न हो।
- कुछ ही मिनट रखें, और बच्चे पर लगातार नजर रखें।
- चेहरे और आंखों पर सीधी धूप न पड़ने दें।
6 महीने से बड़े बच्चे
- सर्दियों में दिन के बीच की हल्की धूप, जब धूप चुभे नहीं, ठीक रहती है।
- 10 से 15 मिनट काफी हो सकते हैं, पर समय मौसम, जगह और बच्चे की त्वचा के हिसाब से अलग होता है।
- बच्चे के हाथ–पैर खुले रख सकते हैं, बाकी शरीर पर हल्के कपड़े रखें।
धूप दिखाते समय ध्यान रखें
- बच्चे की आंखों को धूप से बचाएं। सिर पर हल्की टोपी लगाएं या चेहरा छाया में रखें।
- अगर त्वचा लाल होने लगे, बच्चा बेचैन हो या पसीना आने लगे, तो उसे तुरंत छाया में ले जाएं।
- ठंडी हवा चल रही हो, तो बच्चे को हवा से बचाकर रखें ताकि ठंड न लगे।
धूप में मालिश: क्या ध्यान रखें
धूप में तेल मालिश भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है। मालिश से बच्चे को आराम मिलता है और मां–बच्चे का जुड़ाव बढ़ता है। फिर भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- हल्का, बिना खुशबू वाला तेल चुनें। सरसों का तेल कुछ बच्चों की त्वचा पर जलन कर सकता है, इसलिए पहले थोड़ी जगह पर लगाकर देखें।
- नाक, कान और आंखों में तेल न डालें।
- मालिश के बाद बच्चे को ज्यादा देर तेज धूप में न छोड़ें, क्योंकि तेल लगी त्वचा जल्दी गर्म हो सकती है।
धूप को पीलिया का इलाज न मानें
कई घरों में नवजात को पीलिया होने पर धूप दिखाने की सलाह दी जाती है। धूप पीलिया का भरोसेमंद इलाज नहीं है, और इससे शिशु की त्वचा जल सकती है या उसे ज्यादा गर्मी लग सकती है। अगर नवजात की आंखें या त्वचा पीली दिखें, तो डॉक्टर से बिलीरुबिन की जांच करवाएं।
क्या सिर्फ धूप से विटामिन D पूरा हो जाता है?
अक्सर नहीं। मां के दूध में कई पोषक तत्व भरपूर होते हैं, पर उसमें विटामिन D कम मात्रा में होता है। साथ ही सर्दियों में धूप कमजोर होती है, कोहरा और प्रदूषण किरणों को रोकते हैं, और फ्लैट में रहने वाले कई परिवारों को खुली धूप मिलना भी मुश्किल होता है।
इसलिए इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) जैसी संस्थाएं सलाह देती हैं कि शिशुओं को पहले साल में विटामिन D ड्रॉप्स दी जाएं। आम तौर पर डॉक्टर जन्म के कुछ दिनों बाद से रोज 400 IU ड्रॉप्स की सलाह देते हैं, खासकर स्तनपान करने वाले बच्चों को। ड्रॉप्स शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें, और उनकी बताई मात्रा से ज्यादा न दें, क्योंकि विटामिन D की ज्यादा मात्रा भी नुकसान कर सकती है।
बच्चों में विटामिन D की कमी के लक्षण
हल्की कमी में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं दिखता। ज्यादा कमी होने पर ये संकेत दिख सकते हैं:
- बच्चे का देर से बैठना, खड़ा होना या चलना
- दांत देर से निकलना
- पैरों का बाहर की ओर मुड़ना या घुटनों का आपस में टकराना
- कलाई या टखनों की हड्डियों का चौड़ा दिखना
- बच्चे का चिड़चिड़ा रहना या हड्डियों में दर्द
- बढ़त का धीमा होना
ज्यादा कमी से बच्चों में रिकेट्स हो सकता है, यानी हड्डियों का नरम और कमजोर होना। सोते समय सिर पर पसीना आना कई बच्चों में सामान्य है और यह अकेले विटामिन D की कमी का पक्का संकेत नहीं है।
अगर आपको कोई लक्षण दिखे, तो शिशु रोग विशेषज्ञ से मिलें। जरूरत होने पर डॉक्टर खून की जांच से विटामिन D का स्तर देख सकते हैं।
खानपान से विटामिन D
शिशु के पहले साल में खाने से विटामिन D की ज्यादा मात्रा नहीं मिलती, इसलिए ड्रॉप्स अहम हैं। 6 महीने के बाद ऊपरी आहार शुरू होने पर ये चीजें मदद कर सकती हैं:
- अंडे की जर्दी (डॉक्टर की सलाह से, सही उम्र पर)
- मछली, अगर परिवार खाता है
- विटामिन D वाले फोर्टिफाइड दूध या अनाज
स्तनपान कराने वाली मां का संतुलित आहार भी जरूरी है। मां में विटामिन D की कमी हो, तो डॉक्टर उसके लिए भी सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।
कब डॉक्टर से बात करें
- शिशु को विटामिन D ड्रॉप्स कब से और कितनी देनी हैं, यह जानने के लिए
- बच्चे का विकास धीमा लगे, जैसे देर से बैठना या चलना
- पैर टेढ़े दिखें या हड्डियों में दर्द हो
- धूप में रहने के बाद त्वचा पर फफोले या तेज लाली आए
- नवजात की आंखें या त्वचा पीली दिखें
निष्कर्ष
सर्दियों में शिशु को धूप दिखाना फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते सही समय और सही तरीके से हो: हल्की धूप, कम समय, आंखों और त्वचा का बचाव, और बच्चे पर लगातार नजर। पर सिर्फ धूप पर भरोसा न करें। ज्यादातर शिशुओं के लिए विटामिन D ड्रॉप्स भी जरूरी होती हैं, इसलिए अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से इसकी सही मात्रा और अवधि जरूर पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जरूरी नहीं। नवजात के लिए विटामिन D का भरोसेमंद स्रोत डॉक्टर की बताई ड्रॉप्स हैं। हल्की धूप थोड़ी देर के लिए ठीक है, पर लंबे समय तक सीधी धूप से बचें।
सर्दियों में दिन के बीच की हल्की धूप, जब धूप चुभे नहीं, अच्छी रहती है। सुबह बहुत जल्दी की धूप में विटामिन D बनाने वाली किरणें कम होती हैं।
नहीं। शीशा उन किरणों को रोक देता है जिनसे विटामिन D बनता है। गर्माहट मिलती है, विटामिन D नहीं।
आम तौर पर कम से कम पहले साल तक दी जाती हैं। उसके बाद जरूरत बच्चे के खानपान और धूप पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर से पूछें।
ज्यादातर शिशुओं में हां। सर्दियों की कमजोर धूप, कोहरा, प्रदूषण और कपड़ों से ढका शरीर, इन वजहों से अकेली धूप से जरूरत पूरी नहीं हो पाती।
सांवली त्वचा को विटामिन D बनाने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। पर इसका मतलब ज्यादा देर तेज धूप में रखना नहीं है। ड्रॉप्स ही सुरक्षित तरीका है।
6 महीने से छोटे बच्चों के लिए आम तौर पर सनस्क्रीन की जगह छाया, कपड़े और टोपी बेहतर हैं। बड़े बच्चों के लिए बच्चों वाली सनस्क्रीन डॉक्टर से पूछकर लगाएं।
हां, बहुत ज्यादा विटामिन D से उल्टी, भूख कम लगना और किडनी पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक ही दिन में दो बार खुराक न दें और डॉक्टर की बताई मात्रा ही रखें।
ऐसे दिनों में धूप से विटामिन D कम बनता है, और प्रदूषण बच्चे की सांस के लिए भी ठीक नहीं। इन दिनों बच्चे को घर में रखें और ड्रॉप्स नियमित दें।
हर बच्चे की नियमित जांच जरूरी नहीं होती। अगर विकास धीमा हो, हड्डियों से जुड़े लक्षण दिखें या कोई खास जोखिम हो, तो डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
