Medically Reviewed By
Dr. Neeraj Kumar
Chief Consultant – Paediatrician & Neonatologist, Motherhood Chaitanya Hospital
मां बनने के बाद सबसे पहले जो सवाल मन में आते हैं, उनमें से एक है: क्या मेरा दूध बच्चे के लिए काफी है, और स्तनपान से असल में क्या फायदा होता है? सीधा जवाब है, मां का दूध पहले छह महीनों तक बच्चे की लगभग हर जरूरत पूरी करता है, और इसके फायदे केवल बच्चे तक सीमित नहीं हैं। स्तनपान से मां की सेहत को भी लंबे समय तक लाभ मिलता है।
स्तनपान क्यों जरूरी है
मां का दूध सिर्फ भोजन नहीं है। इसमें बच्चे के लिए जरूरी पोषण, पानी और एंटीबॉडी होते हैं। एंटीबॉडी वे तत्व हैं जो शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। नवजात बच्चे का अपना सुरक्षा तंत्र अभी कमजोर होता है, इसलिए मां के दूध से मिलने वाली यह सुरक्षा बहुत काम आती है।
एक और खास बात यह है कि मां का दूध बच्चे की उम्र और जरूरत के साथ बदलता रहता है। जन्म के बाद के पहले कुछ दिनों का गाढ़ा, पीला दूध (कोलोस्ट्रम) मात्रा में कम होता है, पर सुरक्षा देने वाले तत्वों से भरपूर होता है। इसके बाद दूध धीरे–धीरे पतला और ज्यादा मात्रा में आने लगता है।
स्तनपान के फायदे बच्चे के लिए
बीमारियों से लड़ने की ताकत
मां के दूध से मिलने वाली एंटीबॉडी बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (बीमारी से बचने की ताकत) को सहारा देती हैं। स्तनपान करने वाले बच्चों में कान, पेट और सांस के संक्रमण का खतरा कम पाया गया है।
दस्त और निमोनिया से बचाव
भारत में छोटे बच्चों में दस्त और निमोनिया आम और गंभीर बीमारियां हैं। अध्ययनों में देखा गया है कि जो बच्चे पहले छह महीने केवल मां का दूध पीते हैं, उनमें इन बीमारियों का खतरा कम होता है। एक कारण यह भी है कि मां के दूध में बाहर के पानी या बोतल से होने वाले संक्रमण का खतरा नहीं होता।
आसान पाचन
मां का दूध बच्चे के नाजुक पेट के लिए आसानी से पचने वाला होता है। इससे कब्ज और पेट की परेशानियां अक्सर कम होती हैं, और बच्चे की आंतों में अच्छे बैक्टीरिया पनपने में मदद मिलती है।
दिमागी विकास
मां के दूध में ऐसे वसा (फैट) होते हैं जो दिमाग और आंखों के विकास के लिए जरूरी हैं। कुछ अध्ययनों में स्तनपान करने वाले बच्चों में सीखने–समझने से जुड़े बेहतर नतीजे देखे गए हैं, हालांकि बच्चे का विकास कई और बातों पर भी निर्भर करता है।
सही वजन और आगे की सेहत
स्तनपान करने वाले बच्चे अपनी भूख के हिसाब से दूध पीते हैं, जिससे वजन संतुलित रूप से बढ़ता है। शोध बताते हैं कि आगे चलकर इन बच्चों में मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कुछ कम हो सकता है।
एलर्जी का खतरा
कुछ अध्ययनों के अनुसार स्तनपान से कुछ बच्चों में एक्जिमा (त्वचा की एलर्जी) और सांस से जुड़ी एलर्जी का खतरा कम हो सकता है। इस विषय पर शोध अभी जारी है, इसलिए इसे पक्की सुरक्षा न मानें।
स्तनपान के फायदे मां के लिए
डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवरी
स्तनपान के दौरान शरीर में ऑक्सीटोसिन नाम का हार्मोन बनता है। यह गर्भाशय (बच्चेदानी) को सिकुड़कर अपने पुराने आकार में लौटने में मदद करता है। इससे डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कम होने में भी मदद मिलती है। शुरुआती दिनों में दूध पिलाते समय पेट में हल्की ऐंठन महसूस होना इसी का संकेत है।
कैंसर का खतरा कम
जितना लंबा स्तनपान, उतना ज्यादा लाभ। शोध बताते हैं कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर और अंडाशय (ओवरी) के कैंसर का खतरा कम होता है।
डायबिटीज और दिल की सेहत
स्तनपान से मां में टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी कम पाया गया है। जिन महिलाओं को गर्भावस्था में डायबिटीज हुई हो, उनके लिए यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।
क्या स्तनपान से वजन कम होता है?
दूध बनाने में शरीर अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए कई मांओं को गर्भावस्था का वजन कम करने में मदद मिलती है। पर यह हर महिला में अलग होता है और खानपान, नींद और गतिविधि पर भी निर्भर करता है। वजन घटाने के लिए डिलीवरी के बाद खाना कम न करें, क्योंकि इस समय मां को अच्छे पोषण की जरूरत होती है।
मां और बच्चे का रिश्ता
स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क और नजरों का मिलना मां और बच्चे के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाता है।
परिवार के लिए फायदे
- मां का दूध हमेशा सही तापमान पर और तुरंत उपलब्ध होता है।
- बोतल धोने, उबालने और दूध तैयार करने की झंझट नहीं होती।
- फॉर्मूला दूध का खर्च बचता है।
- रात में दूध पिलाना आसान होता है।
पूरा फायदा पाने के लिए जरूरी बातें
- जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू करें। सिजेरियन डिलीवरी में भी, मां की हालत ठीक हो तो जल्दी शुरुआत की जा सकती है।
- पहला पीला दूध जरूर पिलाएं। इसे फेंकने की पुरानी सलाह सही नहीं है।
- 6 महीने तक केवल स्तनपान कराएं। इस दौरान पानी, घुट्टी, शहद या कोई और चीज न दें। मां के दूध में गर्मी में भी बच्चे के लिए पर्याप्त पानी होता है।
- 6 महीने बाद ऊपरी आहार शुरू करें और स्तनपान 2 साल या उससे ज्यादा समय तक जारी रख सकते हैं।
- भूख के हिसाब से दूध पिलाएं। नवजात आम तौर पर 24 घंटे में 8 से 12 बार दूध पीता है।
कब मदद लें
अगर स्तनपान में लगातार दर्द हो, निप्पल फट रहे हों, बच्चे का वजन ठीक से न बढ़ रहा हो, या आपको लगे कि दूध कम है, तो डॉक्टर या लैक्टेशन काउंसलर (स्तनपान में मदद करने वाले प्रशिक्षित विशेषज्ञ) से मिलें। ज्यादातर परेशानियां सही सलाह से सुधर जाती हैं।
यह भी याद रखें कि हर मां की स्थिति अलग होती है। कुछ मांओं के लिए किसी कारण से स्तनपान संभव नहीं होता। ऐसे में अपराधबोध न रखें और डॉक्टर की सलाह से बच्चे के लिए सही विकल्प चुनें।
निष्कर्ष
स्तनपान के फायदे बच्चे और मां दोनों को मिलते हैं। बच्चे को बीमारियों से सुरक्षा, आसान पाचन और बेहतर विकास में मदद मिलती है, और मां की रिकवरी तेज होती है और कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। जन्म के पहले घंटे में शुरुआत, छह महीने तक केवल मां का दूध और जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ की मदद, ये तीन बातें सबसे ज्यादा काम आती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सबसे बड़ा फायदा संक्रमण से सुरक्षा है। मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडी बच्चे को पेट, सांस और कान के संक्रमण से बचाने में मदद करती हैं, खासकर पहले छह महीनों में।
छह महीने से पहले नहीं। मां के दूध का ज्यादातर हिस्सा पानी ही होता है। गर्मी में बच्चे को बार–बार दूध पिलाएं, अलग से पानी की जरूरत नहीं होती।
दिन में 6 या ज्यादा गीले डायपर, नियमित मल, वजन का सही बढ़ना और दूध पीने के बाद बच्चे का शांत रहना अच्छे संकेत हैं।
आम तौर पर हां। मां का शरीर जो एंटीबॉडी बनाता है, वे दूध से बच्चे तक पहुंचकर उसकी रक्षा करती हैं। हाथ धोएं और खांसते समय मुंह ढकें। दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछें।
हां, हो सकता है, खासकर जब बच्चा ऊपरी आहार लेने लगे या पीरियड्स दोबारा शुरू हो जाएं। केवल स्तनपान पर भरोसा न करें और गर्भनिरोध के बारे में डॉक्टर से बात करें।
स्तन के आकार में बदलाव मुख्य रूप से गर्भावस्था, उम्र और वजन में बदलाव से आता है, सिर्फ स्तनपान से नहीं। सही नाप की ब्रा पहनने से आराम मिलता है।
नहीं। दूध की मात्रा स्तन के आकार पर नहीं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि बच्चा कितनी बार और कितने अच्छे से दूध पीता है।
दाल, हरी सब्जियां, फल, अनाज, दूध–दही और पर्याप्त पानी वाला संतुलित आहार लें। किसी खास चीज से परहेज की जरूरत तभी है जब डॉक्टर कहें या बच्चे को उससे परेशानी दिखे।
हां। ब्रेस्ट पंप या हाथ से दूध निकालकर सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है, जिसे बच्चे को कटोरी–चम्मच या बोतल से दिया जा सकता है। काम पर लौटने से कुछ हफ्ते पहले तैयारी शुरू करना मदद करता है।
इसका कोई तय समय नहीं है। 6 महीने बाद ऊपरी आहार के साथ 2 साल या उससे आगे तक स्तनपान जारी रखा जा सकता है। जब भी छुड़ाएं, धीरे–धीरे छुड़ाएं ताकि मां और बच्चे दोनों को आसानी हो।
