Medically Reviewed By
Dr. Neeraj Kumar
Chief Consultant – Paediatrician & Neonatologist, Motherhood Chaitanya Hospital
जन्म के कुछ दिन बाद अगर आपके बच्चे की आंखें या त्वचा पीली दिखने लगें, तो घबराहट होना स्वाभाविक है। अच्छी बात यह है कि नवजात शिशु में पीलिया बहुत आम है। आधे से ज्यादा स्वस्थ बच्चों को जन्म के पहले हफ्ते में हल्का पीलिया होता है, और ज्यादातर मामलों में यह एक–दो हफ्ते में अपने आप उतर जाता है।
फिर भी कुछ बच्चों में पीलिया तेजी से बढ़ सकता है। जानिए बच्चे को पीलिया होने पर क्या करें और किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
पहले समझें: नवजात शिशु में पीलिया क्यों होता है
पीलिया का कारण है बिलीरुबिन, एक पीले रंग का पदार्थ जो शरीर में पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं (खून के लाल सेल) के टूटने से बनता है। आम तौर पर लिवर इसे शरीर से बाहर निकाल देता है।
नवजात बच्चे का लिवर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए शुरुआती दिनों में बिलीरुबिन थोड़ा जमा हो जाता है और त्वचा पीली दिखती है। ज्यादातर बच्चों में यह सामान्य पीलिया होता है, जो दूसरे–तीसरे दिन दिखता है और धीरे–धीरे उतर जाता है।
कुछ स्थितियों में पीलिया ज्यादा बढ़ सकता है, जैसे:
- समय से पहले जन्म (37 हफ्ते से पहले)
- मां और बच्चे के ब्लड ग्रुप में अंतर
- G6PD की कमी, एक जन्मजात एंजाइम की कमी जो भारत में कई परिवारों में पाई जाती है
- शुरुआती दिनों में बच्चे को पर्याप्त दूध न मिल पाना
बच्चे को पीलिया होने पर क्या करें
बार–बार दूध पिलाएं
दूध पीने से बच्चे को मल ज्यादा होता है, और बिलीरुबिन का बड़ा हिस्सा मल के रास्ते ही बाहर निकलता है।
- 24 घंटे में लगभग 8 से 12 बार स्तनपान कराएं।
- अगर बच्चा बहुत सोता है, तो उसे दूध के लिए हल्के से जगाएं।
- दूध पिलाने में परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर या नर्स से मदद लें।
पेशाब और मल पर नजर रखें
- चौथे–पांचवें दिन तक बच्चे के दिन में लगभग 6 या ज्यादा गीले डायपर होने चाहिए।
- मल का रंग धीरे–धीरे पीला होना चाहिए।
- नवजात का पेशाब लगभग रंगहीन होता है। गहरा पीला पेशाब या सफेद, हल्के रंग का मल डॉक्टर को जरूर बताएं।
फॉलो–अप जांच समय पर करवाएं
कई बच्चे अस्पताल से तब घर आ जाते हैं जब पीलिया अभी बढ़ ही रहा होता है। इसलिए डॉक्टर ने जो दोबारा दिखाने की तारीख दी है, उसे न टालें। जरूरत हो तो बिलीरुबिन जांच से पता चलता है कि पीलिया कितना है। यह जांच त्वचा पर छोटी मशीन लगाकर या एड़ी से खून की कुछ बूंदें लेकर की जाती है।
प्रदूषण के मौसम में बच्चों के लिए सावधानियां
अच्छे इरादे से दिए गए घरेलू उपाय भी नुकसान कर सकते हैं। नवजात शिशु पीलिया में ये सावधानियां रखें:
- पानी या ग्लूकोज का पानी न दें। इससे बच्चे का पेट भरता है, दूध कम पीता है और पीलिया उतरने में देर हो सकती है।
- घुट्टी, शहद या कोई दवा न दें, जब तक डॉक्टर न कहें। एक साल से छोटे बच्चे के लिए शहद सुरक्षित नहीं है।
- धूप को इलाज न मानें। धूप पीलिया का भरोसेमंद इलाज नहीं है, और इससे नाजुक त्वचा जल सकती है या बच्चे को ज्यादा गर्मी लग सकती है।
- स्तनपान बंद न करें। ज्यादातर बच्चों में पीलिया के दौरान भी स्तनपान जारी रखना चाहिए। केवल डॉक्टर की सलाह पर ही बदलाव करें।
- मां के खाने को दोष न दें। हल्दी या पीली चीजें खाने से बच्चे को पीलिया नहीं होता।
घर पर पीलिया कैसे पहचानें
- दिन की प्राकृतिक रोशनी में, खिड़की के पास जांच करें।
- बच्चे के माथे या नाक पर उंगली से एक सेकंड हल्का दबाएं और छोड़ें। अगर उस जगह त्वचा पीली दिखे, तो पीलिया हो सकता है।
- सांवली त्वचा पर आंखों का सफेद हिस्सा, मसूड़े और हथेलियां देखें।
- पीलिया आम तौर पर चेहरे से शुरू होकर नीचे की ओर बढ़ता है। पीलापन जितना नीचे तक फैले, बिलीरुबिन उतना ज्यादा होने की संभावना रहती है।
ध्यान रखें, घर की जांच केवल अंदाजा देती है। पीलिया कितना है, यह सिर्फ बिलीरुबिन जांच से पता चलता है।
पीलिया में बच्चे को कब डॉक्टर को दिखाएं
इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो उसी दिन डॉक्टर को दिखाएं:
- जन्म के 24 घंटे के अंदर पीलिया दिखना
- पीलिया पैरों तक फैलना, या हथेलियां और तलवे पीले होना
- पीलिया में बच्चा दूध नहीं पी रहा या ठीक से चूस नहीं पा रहा
- पीलिया में बच्चा ज्यादा सो रहा है और दूध के लिए मुश्किल से जागता है
- पीलिया के साथ बुखार, या बच्चा असामान्य रूप से ठंडा या ढीला लगे
- गहरा पीला पेशाब, या सफेद, मिट्टी जैसे रंग का मल
- पूरे समय पर जन्मे बच्चे में दो हफ्ते से ज्यादा पीलिया रहना, या समय से पहले जन्मे बच्चे में तीन हफ्ते से ज्यादा
- पीलिया उतरने के बजाय और गहरा होता दिखे
पीलिया में बच्चे को अस्पताल कब ले जाएं: इमरजेंसी संकेत
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें, तो इंतजार न करें और तुरंत अस्पताल जाएं:
- पीलिया में बच्चे का तेज़, पतली आवाज़ में रोना जो सामान्य रोने से अलग लगे
- गर्दन या पीठ का पीछे की ओर मुड़ना, या शरीर का अकड़ना
- बच्चे को जगाना बहुत मुश्किल हो
- दौरे जैसी हरकतें
ये संकेत बहुत ज्यादा बढ़े हुए बिलीरुबिन के हो सकते हैं, जिसमें तुरंत इलाज जरूरी है।
नवजात पीलिया कब खतरनाक होता है
ज्यादातर पीलिया नुकसान नहीं करता। चिंता तब होती है जब बिलीरुबिन बहुत ऊंचे स्तर तक पहुंच जाए और समय पर इलाज न मिले। ऐसी स्थिति में पीलिया से बच्चे के दिमाग पर असर पड़ सकता है।
यह स्थिति दुर्लभ है, और समय पर जांच और इलाज से इसका खतरा काफी कम हो जाता है।
जरूरत होने पर डॉक्टर फोटोथेरेपी की सलाह देते हैं। इसमें बच्चे को एक खास नीली रोशनी के नीचे रखा जाता है, जो बिलीरुबिन को ऐसे रूप में बदल देती है जिसे शरीर पेशाब और मल से बाहर निकाल सके। कुछ बच्चों को करीबी निगरानी के लिए एनआईसीयू (नवजात शिशुओं की गहन देखभाल यूनिट) में रखा जा सकता है।
निष्कर्ष
नवजात शिशु में पीलिया ज्यादातर हल्का होता है और एक–दो हफ्ते में उतर जाता है। बच्चे को बार–बार दूध पिलाएं, पेशाब और मल पर नजर रखें, फॉलो–अप जांच न छोड़ें और धूप या घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें। अगर पीलिया पहले 24 घंटे में दिखे, पैरों तक फैले, दो हफ्ते से ज्यादा रहे, या बच्चा दूध न पी रहा हो या बहुत सुस्त हो, तो उसी दिन शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। मन में शंका हो, तो एक छोटी–सी बिलीरुबिन जांच से स्थिति साफ हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आम तौर पर नहीं। ज्यादातर बच्चों में यह सामान्य होता है। खतरा तब होता है जब बिलीरुबिन बहुत बढ़ जाए और इलाज में देर हो, इसलिए खतरे के संकेतों पर ध्यान दें।
सामान्य पीलिया आम तौर पर एक से दो हफ्ते में उतर जाता है। समय से पहले जन्मे बच्चों में तीन हफ्ते तक लग सकते हैं।
हर बार नहीं। कई बच्चों को सिर्फ निगरानी और दोबारा जांच की जरूरत होती है। भर्ती तब किया जाता है जब फोटोथेरेपी की जरूरत हो या बिलीरुबिन तेजी से बढ़ रहा हो।
हां, ज्यादातर मामलों में बार–बार स्तनपान पीलिया उतरने में मदद करता है। अगर बच्चा ठीक से दूध नहीं पी पा रहा, तो डॉक्टर से फीडिंग के बारे में सलाह लें।
नहीं। धूप भरोसेमंद इलाज नहीं है और नवजात की त्वचा जल्दी जल सकती है। बच्चा पीला दिखे, तो बिलीरुबिन जांच करवाएं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
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हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
हां, सामान्य पीलिया अक्सर दूसरे या तीसरे दिन दिखता है। फिर भी डॉक्टर जांच करके देख सकते हैं कि स्तर बच्चे की उम्र के हिसाब से सुरक्षित है या नहीं।
शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। दो हफ्ते से ज्यादा रहने वाले पीलिया में खून की जांच और मल के रंग की जांच जरूरी होती है, ताकि लिवर से जुड़ी समस्या समय रहते पकड़ी जा सके।
फोटोथेरेपी बंद होने के बाद बिलीरुबिन थोड़ा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर अक्सर एक दिन बाद दोबारा जांच करवाते हैं। थोड़ी बढ़त में आम तौर पर फिर से इलाज की जरूरत नहीं होती।
नहीं। हल्दी या पीली चीजें खाने से बच्चे को पीलिया नहीं होता। मां संतुलित आहार लें और स्तनपान जारी रखें।
आंखों और त्वचा का पीलापन धीरे–धीरे कम होता है, पहले पैरों से और फिर चेहरे से। बच्चा अच्छे से दूध पीता है और सक्रिय रहता है। पक्की जानकारी के लिए डॉक्टर की बताई जांच करवाएं।
